क़दम 1 - नमाज़ से पहले
आराम से तैयारी करें
वुज़ू करें, कोई साफ़ जगह चुनें, क़िबले की तरफ़ मुँह करें और दिल में तय कर लें कि यह कौन-सी नमाज़ है। नीयत को ज़ुबान से बोलना ज़रूरी नहीं है।
इबादत सीखने का टूल
आलिम की जाँच बाक़ी है
दो रकअत की सादी नमाज़ को आराम से समझें, शुरुआत करने वालों के लिए ज़रूरी तिलावतों के साथ, और साफ़ नोट कि कब जाकर किसी से पूछना चाहिए।
शब्द सीखते हुए भी सच्चे दिल से नमाज़ पढ़ें।
हर बारीकी के पीछे भागने से पहले नमाज़ का ढाँचा सीख लें।
जो बात आपकी अपनी स्थिति पर टिकी हो, वह किसी योग्य इमाम से पूछें।
| नमाज़ | समय | रकअतें |
|---|---|---|
| सुबह की नमाज़ (फ़ज्र) | सुबह की पहली रोशनी से सूरज निकलने तक। | 2 |
| दोपहर की नमाज़ (ज़ुहर) | दोपहर के ठीक बाद, जब सूरज अपने सबसे ऊँचे बिंदु से ढल जाए, तब से अस्र शुरू होने तक। | 4 |
| तीसरे पहर की नमाज़ (अस्र) | तीसरे पहर के बीच से सूरज डूबने तक। कोशिश करें कि इसे सूरज पीला पड़ने तक न टालें। | 4 |
| सूरज डूबने के बाद की नमाज़ (मग़रिब) | सूरज डूबने के ठीक बाद से शाम की लाली ख़त्म होने तक। | 3 |
| रात की नमाज़ (इशा) | शाम की लाली ख़त्म होने से आधी रात तक। | 4 |
आप वक़्त के अंदर कभी भी नमाज़ पढ़ सकते हैं, इसलिए मिनट-मिनट का हिसाब रखने की ज़रूरत नहीं। अस्र कब शुरू होती है (हनफ़ी मज़हब में यह बाद में शुरू होती है) और इशा का आख़िरी वक़्त क्या है, इन पर मज़हबों में मतभेद है। गर्मियों में कनाडा के बड़े हिस्से में फ़ज्र और इशा के लिए बदले हुए नियम अपनाए जाते हैं, इसलिए नमाज़ के समय वाला पेज या अपनी स्थानीय मस्जिद का टाइमटेबल देखें।
मुसलमान बनने से पहले के सालों की नमाज़ें आप पर बाक़ी नहीं हैं। पैग़ंबर ने फ़रमाया कि इस्लाम पहले की सब बातों को मिटा देता है, इसलिए आप आज से शुरुआत करते हैं। कुछ उलमा यह भी कहते हैं कि जिस नए मुसलमान को अभी पता नहीं था कि नमाज़ फ़र्ज़ है, उसे उस समय की क़ज़ा भी नहीं पढ़नी होती। अगर आपको पक्का न हो कि यह आप पर कैसे लागू होता है, तो किसी शिक्षक से पूछें।
यह एक नक्शा है, शिक्षक नहीं। इससे क्रम सीखें, फिर किसी स्थानीय इमाम या शिक्षक से कहें कि एक बार आपको देखकर सुधार दें।
क़दम 1 - नमाज़ से पहले
वुज़ू करें, कोई साफ़ जगह चुनें, क़िबले की तरफ़ मुँह करें और दिल में तय कर लें कि यह कौन-सी नमाज़ है। नीयत को ज़ुबान से बोलना ज़रूरी नहीं है।
क़दम 2 - शुरुआती तकबीर
दोनों हाथ उठाएँ और अल्लाहु अकबर कहें। इससे नमाज़ शुरू होती है। इस पल से आप आम बातचीत से निकलकर इबादत में आ जाते हैं।
क़दम 3 - खड़े रहना (क़ियाम)
सूरह अल-फ़ातिहा पढ़ें, फिर कोई छोटी सूरह या वे कुछ आयतें जो आप सीख रहे हैं। अगर अभी आप पढ़ नहीं पाते, तो नीचे 'अगर आप अभी अरबी नहीं पढ़ पाते' वाला हिस्सा बताता है कि इस बीच फ़िक़्ह के मज़हब क्या इजाज़त देते हैं।
क़दम 4 - रुकू
पीठ सीधी और स्थिर रखकर झुकें और रुकू की तस्बीह पढ़ें। उठते समय समिअल्लाहु लिमन हमिदह कहें, और सीधे खड़े हो जाने पर रब्बना व लकल-हम्द कहें। नीचे जाने से पहले ज़रा ठहरें। इसे जल्दी निपटाने के लिए भागें नहीं।
क़दम 5 - सजदा
सजदे में जाएँ और सजदे की तस्बीह पढ़ें। उठकर बैठें और रब्बिग़फ़िर ली कहें, फिर उसी तस्बीह के साथ दूसरा सजदा करें। हर हालत में शरीर को ठहरने दें, फिर आगे बढ़ें।
क़दम 6 - दूसरी रकअत
फिर से खड़े हों और वही क्रम दोहराएँ: सूरह अल-फ़ातिहा, छोटी तिलावत, रुकू, वापस सीधे खड़े होना, फिर दो सजदे।
क़दम 7 - तशह्हुद
दूसरी रकअत के बाद बैठें और तशह्हुद पढ़ें। दो रकअत वाली नमाज़ में यही आख़िरी बैठक है, इसलिए सलाम से पहले पैग़ंबर पर दुरूद (सलवात) भी पढ़ें। तीन या चार रकअत वाली नमाज़ में यह पहली बैठक छोटी होती है और इसके बाद आप फिर खड़े हो जाते हैं। नीचे दिया गया रकअतों का नक़्शा दिखाता है कि कौन-सी बैठक कहाँ आती है।
क़दम 8 - तस्लीम
पहले दाईं तरफ़, फिर बाईं तरफ़ सिर घुमाएँ और हर बार सलाम कहें। इससे नमाज़ पूरी हो जाती है। उठकर अपने दिन में लौटने से पहले एक पल बैठे रहें।
हरकतें एक बार देख लेने से ऊपर का नक्शा समझना आसान हो जाता है। अगर सिर्फ़ कुछ मिनट चाहिए, तो वीडियो के नीचे की सूची से कोई एक नमाज़ चुनें।
किसी हिस्से पर जाएँ
अस्र वाला हिस्सा छोटा है, क्योंकि अस्र ज़ुहर की तरह ही पढ़ी जाती है। वीडियो एक मज़हब के तरीक़े पर चलता है, और मज़हबों के बीच छोटे-छोटे फ़र्क़ आम बात हैं। कैप्शन अपने आप बने हैं।
YouTube पर देखें(नए टैब में खुलता है)
जब तक आप प्ले नहीं दबाते, YouTube से कुछ नहीं आता। उसके बाद वीडियो YouTube के निजता बढ़ाने वाले प्लेयर में चलता है। अगर वीडियो न चले या आप ऑफ़लाइन हों, तो YouTube पर देखें वाला लिंक इस्तेमाल करें। ज़्यादा जानकारी हमारी निजता नीति में.
हर कार्ड में अरबी, उच्चारण और अर्थ है। जहाँ पाठ क़ुरआन का है, वहाँ अनुवाद समझने में मदद के लिए अर्थ का अनुवाद है, और क़ुरआन अरबी ही है।
नमाज़ की शुरुआत
اللَّهُ أَكْبَرُ
उच्चारण
Allahu akbar
अर्थ
अल्लाह सबसे बड़ा है।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
सबसे पहले यही वाक्य सीखें। इसे साफ़ और बिना जल्दी के कहें। उच्चारण अपने आप ठीक होता जाएगा।
हर रकअत में
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ اهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ صِرَاطَ الَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ الْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا الضَّالِّينَ
उच्चारण
Bismillahir-Rahmanir-Rahim. Alhamdu lillahi Rabbil-'alamin. Ar-Rahmanir-Rahim. Maliki yawmid-din. Iyyaka na'budu wa iyyaka nasta'in. Ihdinas-siratal-mustaqim. Siratal-ladhina an'amta 'alayhim ghayril-maghdubi 'alayhim wa lad-dallin.
अर्थ
अर्थ का अनुवाद: तारीफ़, इबादत और मदद अल्लाह ही के लिए है, और हम उससे दुआ करते हैं कि वह हमें सीधे रास्ते पर चलाए।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
अल-फ़ातिहा याद करने का पहला असली लक्ष्य है। एक बार में एक वाक्य लें, और जब तक सीख रहे हैं, किसी उस्ताद से पूछें कि तब तक क्या पढ़ें। जमाअत में, जब इमाम अल-फ़ातिहा ख़त्म करके आमीन (ऐ अल्लाह, क़ुबूल कर) कहें, तो उनके साथ आमीन कहें। अकेले नमाज़ पढ़ते समय इसे कहने के बारे में सवाल हों, तो किसी उस्ताद से पूछें।
पहली दो रकअतों में सूरह अल-फ़ातिहा के बाद
قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ اللَّهُ الصَّمَدُ لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُوًا أَحَدٌ
उच्चारण
Qul huwa Allahu ahad. Allahus-samad. Lam yalid wa lam yulad. Wa lam yakun lahu kufuwan ahad.
अर्थ
अर्थ का अनुवाद: अल्लाह एक है, किसी का मोहताज नहीं, अपनी मख़लूक़ जैसा नहीं, और कोई उसके बराबर नहीं।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
ज़्यादातर नए लोग यहीं से शुरू करते हैं। यह छोटी है और चार पंक्तियों में अल्लाह के एक होने को बयान करती है।
पहली दो रकअतों में सूरह अल-फ़ातिहा के बाद
وَالْعَصْرِ إِنَّ الْإِنسَانَ لَفِي خُسْرٍ إِلَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَتَوَاصَوْا بِالْحَقِّ وَتَوَاصَوْا بِالصَّبْرِ
उच्चारण
Wal-'asr. Innal-insana lafi khusr. Illal-ladhina amanu wa 'amilus-salihat, wa tawasaw bil-haqqi wa tawasaw bis-sabr.
अर्थ
अर्थ का अनुवाद: इंसान घाटे में है, सिवाय उनके जो ईमान लाए, नेक काम किए, और एक-दूसरे को सच और सब्र की नसीहत करते रहे।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
एक बार में एक छोटी सूरह पर काम करें। कई सूरतें जल्दी-जल्दी निपटाने से ज़्यादा फ़ायदा पहले किसी भरोसेमंद क़ारी को सुनने से होता है।
झुके रहते हुए
سُبْحَانَ رَبِّيَ الْعَظِيمِ
उच्चारण
Subhana Rabbiyal-'Azim
अर्थ
पाक है मेरा रब, जो सबसे महान है।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
ज़्यादातर गाइड इसे तीन बार कहना सिखाते हैं। सीखते समय एक बार साफ़ कहना अच्छी शुरुआत है। बारीकियाँ किसी शिक्षक से पूछें।
रुकू से ऊपर आते हुए
سَمِعَ اللَّهُ لِمَنْ حَمِدَهُ رَبَّنَا وَلَكَ الْحَمْدُ
उच्चारण
Sami'a Allahu liman hamidah. Rabbana wa lakal-hamd.
अर्थ
अल्लाह उसकी सुनता है जो उसकी तारीफ़ करता है। ऐ हमारे रब, और सारी तारीफ़ तेरे ही लिए है।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
पहली पंक्ति ऊपर आते हुए कहें और दूसरी सीधे खड़े हो जाने पर। आप 'व' के बिना 'रब्बना लकल-हम्द' भी सुनेंगे। दोनों शब्द हदीस में आए हैं।
सजदे में
سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَى
उच्चारण
Subhana Rabbiyal-A'la
अर्थ
पाक है मेरा रब, जो सबसे ऊँचा है।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
शुरू में कुछ बार सजदा अजीब लगता है। उतनी रफ़्तार से जाएँ जितनी आपके शरीर को ठीक लगे, नीचे पहुँचकर ज़रा ठहरें और तस्बीह सीखें। धीरे चलना कोई कमी नहीं है।
पहले और दूसरे सजदे के बीच
رَبِّ اغْفِرْ لِي
उच्चारण
Rabbighfir li
अर्थ
ऐ मेरे रब, मुझे माफ़ कर दे।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
बस दो शब्द, और पैग़ंबर इन्हें दोहराते थे। इसे एक या दो बार कहें। अगर आप चाहें तो बाद में कोई शिक्षक इसका लंबा रूप सिखा सकता है।
हर बैठक में: दूसरी रकअत के बाद और आख़िर में
التَّحِيَّاتُ لِلَّهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَى عِبَادِ اللَّهِ الصَّالِحِينَ أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
उच्चारण
At-tahiyyatu lillahi was-salawatu wat-tayyibat. As-salamu 'alayka ayyuhan-Nabiyyu wa rahmatullahi wa barakatuh. As-salamu 'alayna wa 'ala 'ibadillahis-salihin. Ash-hadu an la ilaha illallah, wa ash-hadu anna Muhammadan 'abduhu wa rasuluh.
अर्थ
सारे आदाब, सारी दुआएँ और सारी अच्छी चीज़ें अल्लाह के लिए हैं। ऐ नबी, आप पर सलामती हो, और अल्लाह की रहमत और बरकतें। हम पर और अल्लाह के नेक बंदों पर सलामती हो। मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद उसके बंदे और रसूल हैं।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
ये इब्ने मसऊद से रिवायत किए गए शब्द हैं। दूसरी सहीह रिवायतों में आप थोड़े अलग शब्द भी सुन सकते हैं, इसलिए अपने शिक्षक के बताए तरीक़े पर चलें। इसे एक-एक पंक्ति करके सीखें।
आख़िरी बैठक में, तशह्हुद के बाद
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا بَارَكْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
उच्चारण
Allahumma salli 'ala Muhammadin wa 'ala ali Muhammad, kama sallayta 'ala Ibrahima wa 'ala ali Ibrahim, innaka Hamidun Majid. Allahumma barik 'ala Muhammadin wa 'ala ali Muhammad, kama barakta 'ala Ibrahima wa 'ala ali Ibrahim, innaka Hamidun Majid.
अर्थ
ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर और मुहम्मद के घरवालों पर अपनी रहमत भेज, जैसे तूने इब्राहीम पर और इब्राहीम के घरवालों पर अपनी रहमत भेजी। बेशक तू तारीफ़ के लायक़ और बड़ी शान वाला है। ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर और मुहम्मद के घरवालों पर अपनी बरकतें भेज, जैसे तूने इब्राहीम पर और इब्राहीम के घरवालों पर अपनी बरकतें भेजीं। बेशक तू तारीफ़ के लायक़ और बड़ी शान वाला है।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
इसे आख़िरी बैठक में, तशह्हुद के बाद और सलाम से पहले पढ़ें। लंबी नमाज़ की पहली बैठक में भी इसे पढ़ा जाए या नहीं, इस पर फ़िक़्ह के मज़हबों (चारों इमामों) की राय अलग है, इसलिए अपने शिक्षक से पूछें।
नमाज़ का अंत
السَّلَامُ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَةُ اللَّهِ
उच्चारण
As-salamu 'alaykum wa rahmatullah
अर्थ
आप पर सलामती हो और अल्लाह की रहमत।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
इससे नमाज़ पूरी होती है। हर तरफ़ धीरे से सिर घुमाएँ। बहुत बड़ी हरकत करने की ज़रूरत नहीं है।
हर नमाज़ एक बैठक पर ख़त्म होती है। तीन या चार रकअत वाली नमाज़ों में दूसरी रकअत के बाद एक छोटी बैठक भी होती है।
Islamwise के छोटे पाठ, जो Green Lane Masjid के साथ चलने वाला नए मुसलमानों का प्रोजेक्ट है। हर पाठ एक वाक्य धीरे से बोलता है और उसका अर्थ समझाता है।
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सीखते समय यह ज़िक्र पढ़ना मज़हबों की कई रायों में से एक है। तिलावत सीखने से पहले नमाज़ पढ़ने वाला हिस्सा देखें।
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29 छोटे पाठ, हर पाठ में एक वाक्य, जिनमें सूरह अल-फ़ातिहा आयत-दर-आयत, तशह्हुद और दुरूद (सलवात) शामिल हैं।
YouTube पर पूरी सीरीज़ खोलेंयह शुरुआत करने वालों के लिए एक झलक है। बारीकियाँ फ़िक़्ह के मज़हबों के बीच और हालात के हिसाब से अलग होती हैं।
असल ज़िंदगी नमाज़ के रास्ते में आ जाती है। यहाँ अपनी स्थिति ढूँढें और सीधे जवाब पर जाएँ।
अगर आप नमाज़ का कोई हिस्सा भूल जाएँ, ग़लती से कुछ बढ़ा दें, या रकअतों की गिनती भूल जाएँ, तो इसे ठीक करने का आसान तरीक़ा है: दो अतिरिक्त सजदे, जिन्हें सजदा-ए-सह्व यानी भूल का सजदा कहते हैं। बहुत-सी ग़लतियों में नमाज़ दोबारा शुरू करने की ज़रूरत नहीं होती।
जब तक आप नए हैं, नमाज़ आराम से पूरी करें और बाद में उस ख़ास ग़लती के बारे में किसी शिक्षक से पूछें। कोई आपसे यह उम्मीद नहीं करता कि पहले महीनों में आपको हर नियम पता हो।
जमाअत शुरू हो जाने के बाद मस्जिद में पहुँचना हर किसी के साथ होता है। पैग़ंबर (उन पर शांति हो) ने फ़रमाया कि इत्मीनान से आओ, जो मिल जाए वह पढ़ो और जो छूट गया उसे पूरा करो (सहीह अल-बुख़ारी 636)।
किसी स्थानीय इमाम से एक बार देर से शामिल होने का तरीक़ा समझ लें। इसमें पाँच मिनट लगते हैं और बहुत सी चिंता बच जाती है।
आप लगभग हर उस जगह नमाज़ पढ़ सकते हैं जो पाक हो। बैग में रखी कुछ छोटी चीज़ें काम पर, स्कूल में या सफ़र में इसे आसान बना देती हैं।
जनाज़े की नमाज़ खड़े होकर, इमाम के पीछे पढ़ी जाती है, जिसमें न रुकू होता है न सजदा। यह छोटी होती है, आम तौर पर कुछ मिनट। इसमें शामिल होने पर सवाब है, और दफ़न तक रुकने पर और ज़्यादा (सहीह अल-बुख़ारी 1325)।
अगर आपके किसी जानने वाले की मौत हुई है, तो स्थानीय मस्जिद बता सकती है कि जनाज़े की नमाज़ कब और कहाँ है।
अगर दर्द, बीमारी या विकलांगता की वजह से खड़े होना, रुकू या सजदा करना मुश्किल हो, तो जैसे आपका शरीर इजाज़त दे वैसे नमाज़ पढ़ें। पैग़ंबर ने एक बीमार सहाबी से कहा कि खड़े होकर पढ़ो, न हो सके तो बैठकर, और यह भी न हो सके तो करवट के बल लेटकर।
कोई स्थानीय इमाम या उस्ताद आपको एक बार नमाज़ पढ़ते देखकर यह तय करने में मदद कर सकता है कि आपके शरीर के लिए क्या ठीक है। अपनी नमाज़ गिनवाने के लिए आपको कभी दर्द सहने की ज़रूरत नहीं। अस्पताल में जितना हो सके बिस्तर पर ही नमाज़ पढ़ें, और नर्सों से पूछें कि क्या अस्पताल में आध्यात्मिक देखभाल (spiritual care) की टीम है।
किसी हिस्से पर जाएँ
ज़मीन पर, कुर्सी पर, बिना रुकू किए खड़े होकर और बिस्तर पर लेटकर नमाज़ पढ़ना दिखाता है।
YouTube पर देखें(नए टैब में खुलता है)
जब तक आप प्ले नहीं दबाते, YouTube से कुछ नहीं आता। उसके बाद वीडियो YouTube के निजता बढ़ाने वाले प्लेयर में चलता है। अगर वीडियो न चले या आप ऑफ़लाइन हों, तो YouTube पर देखें वाला लिंक इस्तेमाल करें। ज़्यादा जानकारी हमारी निजता नीति में.
एक और छोटा प्रदर्शन, जिसमें मस्जिद की सफ़ में कुर्सी पर नमाज़ पढ़ना भी दिखाया गया है।
नमाज़ आराम से पूरी करें, फिर बाद में उस ख़ास ग़लती के बारे में पूछें। अक्सर ग़लती से ज़्यादा नुक़सान घबराहट से होता है।
उच्चारण बस दोहराने से ही आता है। अल्लाह जानता है कि कौन कोशिश नहीं कर रहा और कौन अभी सीख रहा है।
ये फ़र्क़ आम तौर पर सब सही होते हैं, और इनमें से कोई भी नमाज़ छोड़ने की वजह नहीं है। शुरुआत के लिए एक भरोसेमंद तरीक़ा सीखें, और फिर से बदलने से पहले किसी शिक्षक से पूछ लें।
इतना धीरे चलें कि हर हालत साफ़ अलग दिखे। छोटी और सुकून भरी नमाज़ जल्दबाज़ी और घबराहट वाली नमाज़ से ज़्यादा सिखाती है।
यह शुरुआत करने वालों का साथी है। हवाले जाँचे जा चुके हैं। नमाज़ के निजी मसले, किसी ख़ास मज़हब की बारीकियाँ, विकलांगता में सहूलियतें और असामान्य हालात अब भी किसी योग्य व्यक्ति से जाँचने ज़रूरी हैं।
Quran.com - क़ुरआन के पाठ और अनुवाद का संदर्भ
सूरह अल-फ़ातिहा के अरबी पाठ का स्रोत, जो नमाज़ की तिलावत में और हिदायत की दुआ में इस्तेमाल होता है। अंग्रेज़ी शब्द अर्थ का अनुवाद हैं।
Quran.com - क़ुरआन के पाठ और अनुवाद का संदर्भ
नमाज़ पढ़ना सीखें (सलात) वाले टूल में छोटी सूरह के उदाहरण के तौर पर इस्तेमाल हुई है। अंग्रेज़ी शब्द अर्थ का अनुवाद हैं।
Quran.com - क़ुरआन के पाठ और अनुवाद का संदर्भ
नमाज़ पढ़ना सीखें (सलात) वाले टूल में छोटी सूरह के उदाहरण के तौर पर इस्तेमाल हुई है। अंग्रेज़ी शब्द अर्थ का अनुवाद हैं।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
इस सिद्धांत के लिए दिया गया है कि नमाज़ पैग़ंबर के सिखाए तरीक़े से सीखी जाती है। शुरुआती लोगों के लिए बारीक बातें योग्य शिक्षकों पर छोड़ी गई हैं।
New Muslim Guide - नमाज़ पर शुरुआती गाइड
नमाज़ की शुरुआती समझ और नमाज़ के क्रम के लिए दिया गया है। मसले और निजी हालात योग्य शिक्षकों पर छोड़े गए हैं।
Sunnah.com - दुआ और ज़िक्र का संदर्भ
नमाज़ पढ़ना सीखें (सलात) वाले टूल में रुकू के शुरुआती वाक्य का स्रोत।
Sunnah.com - दुआ और ज़िक्र का संदर्भ
नमाज़ पढ़ना सीखें (सलात) वाले टूल में सजदे के शुरुआती वाक्य का स्रोत।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
तशह्हुद के परिचय का स्रोत, इस याद दिलाने के साथ कि पूरे शब्द किसी योग्य शिक्षक से या किसी भरोसेमंद रिकॉर्डिंग से सीखें।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
नमाज़ के आख़िर में कहे जाने वाले सलाम का स्रोत।
SeekersGuidance - योग्य शिक्षकों से इस्लामी शिक्षा
वहाँ उद्धृत जहाँ गाइड आगे नहीं जाती और कहती है कि अपनी स्थिति के बारे में किसी योग्य आलिम से पूछें।
Green Lane Masjid and Community Centre (Birmingham, UK) - वीडियो (YouTube)
फ़ज्र, ज़ुहर, मग़रिब और इशा को पूरा करके दिखाता है। अस्र वाला अध्याय 27 सेकंड का है और शायद ज़ुहर की ओर वापस इशारा करता है। बनाने वाले के दिए समय: 1:11 नमाज़ से पहले, 2:23 पाँच नमाज़ें, 2:47 शब्दावली और रकअतों का परिचय, 3:48 फ़ज्र, 11:27 ज़ुहर, 22:31 अस्र, 22:58 मग़रिब, 32:59 इशा। सिर्फ़ अपने-आप बने अंग्रेज़ी कैप्शन हैं। एक ही मज़हब के तरीक़े पर चलता है। YouTube के निजता बढ़ाने वाले प्लेयर (youtube-nocookie.com) से जोड़ा गया है और तभी लोड होता है जब आप प्ले दबाते हैं। YouTube Standard Licence; अपलोड करने वाले ने एम्बेड करने की अनुमति दी है (2026-09-23 को जाँचा गया)। डाउनलोड करने या दोबारा अपलोड करने का अधिकार नहीं है।
Islamwise (new Muslim project with Green Lane Masjid) - वीडियो (YouTube)
एपिसोड 10: एक रकअत का हर वाक्य, अल्लाहु अकबर से सलाम तक, जामे ज़िक्र के साथ। आंशिक रूप से जाँचा गया। सूरह अल-फ़ातिहा सीखने तक ज़िक्र के वाक्य पढ़ना फ़िक़्ह की एक राय है, जिसकी समीक्षा ज़रूरी है। YouTube के निजता बढ़ाने वाले प्लेयर (youtube-nocookie.com) से जोड़ा गया है और तभी लोड होता है जब आप प्ले दबाते हैं। YouTube Standard Licence; अपलोड करने वाले ने एम्बेड करने की अनुमति दी है (2026-09-23 को जाँचा गया)। डाउनलोड करने या दोबारा अपलोड करने का अधिकार नहीं है।
Islamwise (new Muslim project with Green Lane Masjid) - वीडियो (YouTube)
एपिसोड 3: पाँच वाक्य (सुब्हानल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाह, अल्लाहु अकबर, ला हौला व ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह), जिन्हें सूरह अल-फ़ातिहा सीखने तक नमाज़ की हर हालत में पढ़ा जा सकता है। यह फ़िक़्ह की एक राय है; बारीकियाँ मज़हब के हिसाब से बदलती हैं। YouTube के निजता बढ़ाने वाले प्लेयर (youtube-nocookie.com) से जोड़ा गया है और तभी लोड होता है जब आप प्ले दबाते हैं। YouTube Standard Licence; अपलोड करने वाले ने एम्बेड करने की अनुमति दी है (2026-09-23 को जाँचा गया)। डाउनलोड करने या दोबारा अपलोड करने का अधिकार नहीं है।
Islamwise (new Muslim project with Green Lane Masjid) - वीडियो (YouTube)
नमाज़ में जो कहा जाता है उस पर वाक्य-दर-वाक्य पाठ: सूरह अल-फ़ातिहा आयत-दर-आयत (एपिसोड 11 से 18), तशह्हुद और दुरूद। एपिसोड के विवरण में पेश करने वाले की निजी प्लेलिस्ट का लिंक है; आप यही Islamwise प्लेलिस्ट इस्तेमाल करें। आंशिक रूप से जाँचा गया। सिर्फ़ लिंक दिया गया है, एम्बेड नहीं किया गया। YouTube Standard Licence; डाउनलोड करने या दोबारा अपलोड करने का अधिकार नहीं है।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
रुकू से उठते हुए पैग़ंबर ने 'समिअल्लाहु लिमन हमिदह' कहा, फिर खड़े होकर 'रब्बना व लकल-हम्द' (इस रिवायत में 'रब्बना लकल-हम्द' भी आया है)। सहीह अल-बुख़ारी में।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
दोनों सजदों के बीच पैग़ंबर ने 'रब्बिग़फ़िर ली, रब्बिग़फ़िर ली' कहा। Sunnah.com पर दर्जा सहीह (दारुस्सलाम)।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
रुकू में अपने सबसे महान रब की पाकी, सजदे में अपने सबसे ऊँचे रब की पाकी, और दोनों सजदों के बीच 'ऐ मेरे रब, मुझे माफ़ कर दे'। Sunnah.com पर दर्जा सहीह (अल-अल्बानी)।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
पैग़ंबर और उनके परिवार पर दुरूद के शब्द, जैसे इब्राहीम और उनके परिवार पर। सहीह अल-बुख़ारी में।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
पैग़ंबर ने सिखाया: तकबीर कहो, क़ुरआन में से जो याद हो वह पढ़ो, रुकू करो यहाँ तक कि इत्मीनान हो जाए, सीधे खड़े हो, सजदा करो यहाँ तक कि इत्मीनान हो जाए, बैठो यहाँ तक कि इत्मीनान हो जाए। सहीह अल-बुख़ारी में।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
लंबी रिवायत, जिसमें हर रकअत के दूसरे सजदे का ज़िक्र है। सहीह अल-बुख़ारी में।
The Islamic Foundation of Ireland - शुरुआती पुस्तिका
इमाम यहया एम. अल-हुसैन, भूमिका 1999 की। हर नमाज़ में रकअतों की गिनती और तशह्हुद कहाँ आता है (फ़ज्र में दूसरी के बाद; ज़ुहर, अस्र और इशा में दूसरी और चौथी के बाद; मग़रिब में दूसरी और तीसरी के बाद)। इसमें वुज़ू तोड़ने वाली चीज़ों की सूची में गुप्तांग छूना शामिल है और ख़ून बहना और उल्टी शामिल नहीं हैं, जो हनफ़ी राय नहीं है। सिर्फ़ लिंक; कोई लाइसेंस नहीं बताया गया।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
पैग़ंबर की हिदायत: अगर शक हो कि कितनी रकअतें पढ़ीं, तो जिस पर यक़ीन हो उसी पर आगे बढ़ें और सलाम से पहले दो सजदे करें। सहीह मुस्लिम में।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
ग़लती से पाँच रकअतें पढ़ने के बाद पैग़ंबर ने सलाम के बाद दो सजदे किए। सहीह अल-बुख़ारी में।
SeekersGuidance - आलिम का जवाब
शैख़ डॉ. बासिम इतानी, 26 जून 2024। सजदा-ए-सह्व (भूल का सजदा) का हनफ़ी तरीक़ा और यह कब ज़रूरी होता है। सिर्फ़ लिंक (सभी अधिकार सुरक्षित)।
NewMuslims.com - पाठ
इमाम मुफ़्ती, 2016। भूल का सजदा कब किया जाता है, सलाम से पहले और सलाम के बाद के तरीक़े, और यह कि इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ने वाला अपना अलग सजदा नहीं करता। सिर्फ़ लिंक।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
फ़ज्र का समय सूरज निकलना शुरू होने तक रहता है; ज़ुहर का अस्र आने तक; अस्र का सूरज पीला पड़ने तक; मग़रिब का शाम की लाली ख़त्म होने तक; इशा का आधी रात बीतने तक। सहीह मुस्लिम में।
Quran.com - क़ुरआन संदर्भ
'नमाज़ अदा करना ईमान वालों पर तय समय पर फ़र्ज़ है' (The Clear Quran, अर्थ का अनुवाद)।
NewMuslims.com - पाठ
शुरुआती लोगों के लिए पाँचों नमाज़ों की तालिका, उनकी रकअतों और समय के साथ, जिसमें इशा का समय आधी रात तक है (मजबूरी में फ़ज्र तक बढ़ सकता है)। इसमें अरबी में नमाज़ पढ़ने को शर्त बताया गया है, जो उस हनफ़ी छूट से अलग है जो अभी तिलावत न कर पाने वाले को दी जाती है। सिर्फ़ लिंक।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
पैग़ंबर ने अम्र इब्न अल-आस से कहा: 'क्या तुम नहीं जानते कि इस्लाम पिछले सारे गुनाह मिटा देता है?' सहीह मुस्लिम में।
SeekersGuidance - आलिम का जवाब
उस्तादा शाइस्ता मक़बूल, शैख़ फ़राज़ रब्बानी द्वारा जाँचा गया, 4 सितंबर 2012। ग़ैर-मुस्लिम देश में इस्लाम अपनाने वाला उस समय की नमाज़ों का ज़िम्मेदार नहीं है जब उसे पता नहीं था कि नमाज़ फ़र्ज़ है; बाद में छूटी नमाज़ें ऐसे क्रम से क़ज़ा की जाती हैं जो निभाया जा सके। यह हनफ़ी संदर्भ का जवाब है; यह इस्लाम से पहले की नमाज़ों के बारे में सीधे बात नहीं करता। सिर्फ़ लिंक।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
पैग़ंबर ने बीमार इमरान इब्न हुसैन से कहा: खड़े होकर नमाज़ पढ़ो, अगर न हो सके तो बैठकर, और अगर यह भी न हो सके तो करवट के बल लेटकर। सहीह अल-बुख़ारी में।
SeekersGuidance - आलिम का जवाब
उस्ताद तबरेज़ आज़म, 8 फ़रवरी 2013। खड़ा होना कब छोड़ा जा सकता है (असमर्थता, तेज़ दर्द या चक्कर, नुक़सान का डर), हो सके तो ज़मीन पर असली सजदों के साथ नमाज़ पढ़ना, वरना सिर के इशारे से, और ज़मीन पर बैठना मुश्किल हो तो कुर्सी का इस्तेमाल। सिर्फ़ लिंक।
SeekersGuidance - आलिम का जवाब
शैख़ डॉ. मुहम्मद अबू बक्र बाज़ीब, 20 जून 2024। थोड़े समय की और लंबी बीमारी, क़िबले की ओर मुँह करके कुर्सी पर या लेटकर नमाज़ पढ़ना, और सिर के इशारे में सजदे को रुकू से नीचा रखना। सिर्फ़ लिंक।
Green Lane Masjid and Community Centre (Birmingham, UK) - वीडियो (YouTube)
ज़मीन पर बैठकर, कुर्सी पर, बिना झुके खड़े होकर और बिस्तर पर लेटकर नमाज़ पढ़ना, हर तरीक़ा करके दिखाया गया है। YouTube के अध्याय: 1:06 ज़मीन पर बैठकर, 2:51 कुर्सी पर, 3:35 झुक न पाने पर, 4:39 बिस्तर पर लेटकर। कुर्सी से जुड़ी बारीकियों पर मज़हबों में मतभेद है। YouTube के निजता बढ़ाने वाले प्लेयर (youtube-nocookie.com) से जोड़ा गया है और तभी लोड होता है जब आप प्ले दबाते हैं। YouTube Standard Licence; अपलोड करने वाले ने एम्बेड करने की अनुमति दी है (2026-09-23 को जाँचा गया)। डाउनलोड करने या दोबारा अपलोड करने का अधिकार नहीं है।
Sheikh Assim al-Hakeem (official channel) - वीडियो (YouTube)
खड़े न हो पाने पर कुर्सी पर नमाज़ पढ़ना, अकेले और मस्जिद की सफ़ में। आंशिक रूप से जाँचा गया; कुर्सी से जुड़ी बारीकियों पर मज़हबों में मतभेद है। सिर्फ़ लिंक दिया गया है, एम्बेड नहीं किया गया। YouTube Standard Licence; डाउनलोड करने या दोबारा अपलोड करने का अधिकार नहीं है।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
एक आदमी ने कहा कि वह क़ुरआन में से कुछ भी याद नहीं कर पाता, तो पैग़ंबर ने उसे सुब्हानल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाह, अल्लाहु अकबर, ला हौला व ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह सिखाया। Sunnah.com पर दर्जा हसन (अल-अल्बानी)।
SeekersGuidance - आलिम का जवाब
शैख़ यूसुफ़ वेल्च, शैख़ फ़राज़ रब्बानी द्वारा जाँचा गया, 21 अप्रैल 2024। हनफ़ी: जो अभी अरबी न पढ़ सके वह अनुवाद पढ़ सकता है, या इसके बजाय अरबी के ज़िक्र वाले वाक्य कह सकता है, जिसे यह जवाब ज़्यादा एहतियात वाला बताता है क्योंकि यह हनफ़ी और शाफ़ई दोनों मज़हबों में सही है। शाफ़ई: सीखने वाला नमाज़ में मुसहफ़ से सूरह अल-फ़ातिहा पढ़ सकता है; अनुवाद की इजाज़त नहीं है। मालिकी और हंबली: किसी दूसरी भाषा में तिलावत सही नहीं है। सूरह अल-फ़ातिहा धीरे-धीरे सीखें। सिर्फ़ लिंक।
SeekersGuidance - आलिम का जवाब
शैख़ फ़राज़ रब्बानी, 18 जनवरी 2012। हनफ़ी: नमाज़ में क़ुरआन हाथ में लेकर उससे पढ़ना सख़्त नापसंद है; सूरह अल-फ़ातिहा सीखने के दौरान नया मुसलमान होना एक जायज़ मजबूरी है; कोई छोटी आयत सीख लें, जैसे क़ुल हुवल्लाहु अहद। सिर्फ़ लिंक।
Dar al-Ifta al-Misriyyah - आलिम का जवाब
3 मार्च 2015। जो नया मुसलमान अभी सूरह अल-फ़ातिहा नहीं पढ़ सकता, वह इसके बजाय अल्लाह का ज़िक्र कर सकता है। इसमें अब्दुल्लाह इब्न अबी औफ़ा की रिवायत और इब्न क़ुदामा (हंबली) का हवाला दिया गया है। सिर्फ़ लिंक।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
जो क़ुरआन पढ़ते हुए अटकता है और उसे मुश्किल लगती है, उसके लिए दोहरा सवाब है। सहीह मुस्लिम में।
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सहीह अल-बुख़ारी 636 (अबू हुरैरा), सहीह अल-बुख़ारी में: इक़ामत सुनो तो सुकून से नमाज़ की तरफ़ चलो, इमाम के साथ जो मिले वह पढ़ो और जो छूट गया वह पूरा करो। मसबूक़ शब्द का आधार।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
सुनन अबी दाऊद 893 (अबू हुरैरा): अगर तुम ऐसे वक़्त आओ जब इमाम सजदे में हो, तो उसके साथ सजदा करो और उसे (रकअत) मत गिनो। अरबी में यह भी है कि जिसने रुकू पा लिया उसने रकअत पा ली। अल-अल्बानी ने इसे हसन कहा है।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
सहीह अल-बुख़ारी 780 (अबू हुरैरा), सहीह अल-बुख़ारी में: जब इमाम अल-फ़ातिहा के बाद आमीन कहे तो तुम भी आमीन कहो। यह इबारत इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ने के बारे में है; इसमें अकेले नमाज़ पढ़ने या कितनी ऊँची आवाज़ में कहने की बात नहीं है।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
सहीह अल-बुख़ारी 725 (अनस): सफ़ें सीधी करो; सहाबा कंधे से कंधा और पैर से पैर मिलाकर खड़े होते थे। सहीह।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
सहीह अल-बुख़ारी में (सहीह)। जो मस्जिद में दाख़िल हो, वह बैठने से पहले दो रकअत पढ़े। पेज पर समय के बारे में फ़िक़्ह के मज़हबों के मतभेद नहीं दिए गए।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
सहीह मुस्लिम में (सहीह)। एक आदमी तब आया जब पैग़ंबर जुमे का ख़ुतबा दे रहे थे, और उससे कहा गया कि खड़ा होकर दो रकअत पढ़े। ख़ुतबे के दौरान इसे लागू करने पर उलमा की राय अलग-अलग है।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
सुनन अन-नसाई 1425 (अबू हुरैरा): जिसने जुमे की एक रकअत पा ली उसने जुमा पा लिया। दारुस्सलाम ने इसे सहीह कहा है।
SeekersGuidance - आलिम का जवाब
उस्ताज़ तबरेज़ आज़म, शेख़ फ़राज़ रब्बानी की जाँच के साथ, 15 जनवरी 2017। इमाम के मिंबर पर चढ़ने के बाद न नमाज़ पढ़ी जाए, न बात की जाए; अगर कोई आख़िरी सलाम से पहले शामिल हो जाए तो उसने जुमा पा लिया, और वह दो रकअतें पूरी करता है।
SeekersGuidance - आलिम का जवाब
शेख़ डॉ. मुहम्मद फ़ायज़ अवाद, 26 दिसंबर 2024। अगर इमाम रुकू में मिल जाए तो रकअत मिल जाती है (इस पर उलमा एक हैं); खड़े होने से पहले दोनों सलाम का इंतज़ार करना मुस्तहब है; जो हिस्सा इमाम के साथ पढ़ा, वह अपनी नमाज़ का पहला हिस्सा है।
SeekersGuidance - आलिम का जवाब
मौलाना अशरफ़ अली थानवी की Heavenly Ornaments (बहिश्ती ज़ेवर) से संपादित, 22 अगस्त 2011। जुमे की नमाज़ बीमार, मुसाफ़िर, औरत, बच्चे या ग़ुलाम पर फ़र्ज़ नहीं; अगर कोई मुसाफ़िर या औरत जुमे में शामिल हो जाए तो ज़ुहर उस पर बाक़ी नहीं रहती; चार सुन्नतें पहले और चार बाद में; जब इमाम ख़ुतबे के लिए खड़ा हो जाए तो कोई नमाज़ नहीं।
SeekersGuidance - आलिम का जवाब
शेख़ा मोना अल-ज़नकली और साइरा अबूबक्र, शेख़ रामी नसूर की मंज़ूरी के साथ, 26 अगस्त 2013। वित्र रोज़ की एक ताकीदी सुन्नत है; फ़ज्र से पहले दो (रग़ीबा); ज़ुहर से पहले और बाद में चार, अस्र से पहले चार, मग़रिब के बाद दो से छह; जुमे के लिए कुछ तय नहीं; जब इमाम ख़ुतबे के लिए आ जाए तो कोई नफ़्ल नमाज़ नहीं।
Quran.com - क़ुरआन संदर्भ
हर नमाज़ की जगह पर अपनी ज़ीनत अपनाओ (अल-आराफ़ 7:31)। नमाज़ के लिए ठीक से कपड़े पहनने के लिए इस्तेमाल हुआ।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
सुनन अबी दाऊद 641 (आइशा): बालिग़ औरत की नमाज़ सिर ढके बिना क़बूल नहीं होती। अल-अल्बानी ने इसे सहीह कहा है।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
सुनन अबी दाऊद 650 (अबू सईद): पैग़ंबर ने अपनी चप्पलें पहनकर नमाज़ पढ़ी और लोगों से कहा कि वे अपनी चप्पलों में गंदगी देख लें और फिर उन्हें पहनकर नमाज़ पढ़ें। अल-अल्बानी ने इसे सहीह कहा है।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
सुनन अबी दाऊद 695, अल-अल्बानी ने इसे सहीह कहा है: जब तुम किसी आड़ (सुतरा) की तरफ़ मुँह करके नमाज़ पढ़ो, तो उसके क़रीब रहो।
Quran.com - क़ुरआन संदर्भ
तुम जहाँ भी हो, अपना मुँह अल-मस्जिद अल-हराम की तरफ़ करो (अल-बक़रा 2:144)। क़िबले की तरफ़ मुँह करने का आधार।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
जामे अत-तिर्मिज़ी 344 (अबू हुरैरा): पूरब और पश्चिम के बीच जो है, वह क़िबला है। दारुस्सलाम ने इसे सहीह कहा है। यह मदीना में कहा गया था; उलमा इसे उस इंसान पर लागू करते हैं जो काबा को नहीं देख सकता और उसकी आम दिशा की तरफ़ मुँह करता है।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
सहीह मुस्लिम 560a (आइशा): जब खाना परोसा जा चुका हो, या जब इंसान को टॉयलेट की सख़्त हाजत हो, तब नमाज़ नहीं। सहीह।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
सहीह अल-बुख़ारी 1333 (अबू हुरैरा): पैग़ंबर ने अन-नजाशी के लिए सफ़ें बनाकर जनाज़े की नमाज़ पढ़ाई और चार तकबीरें कहीं। सहीह।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
सहीह अल-बुख़ारी 1325 (अबू हुरैरा): जनाज़े की नमाज़ में शामिल होने पर एक क़ीरात सवाब, और दफ़न तक रुकने पर दो। सहीह।
IslamQA - आलिम का जवाब
शेख़ मुहम्मद सालेह अल-मुनज्जिद की निगरानी में। चार तकबीरें: पहली के बाद अल-फ़ातिहा, दूसरी के बाद पैग़ंबर पर दुरूद, तीसरी के बाद मय्यत के लिए दुआ, फिर चौथी तकबीर और सलाम। यह एक तरीक़ा है; फ़िक़्ह के दूसरे मज़हबों में तफ़सील में फ़र्क़ है।