सुब्हानअल्लाह
سُبْحَانَ اللَّهِ
उच्चारण
SubhanAllah
अर्थ
अल्लाह पाक है।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
एक छोटा ज़िक्र जो आपके दिल को फिर से अल्लाह की ओर मोड़ देता है। तब काम आता है जब मन भटक गया हो।
शुरुआत करने वालों के लिए
आलिम की जाँच बाक़ी है
शुरुआत के लिए दुआओं और ज़िक्र के वाक्यों का एक छोटा संग्रह, स्रोतों के साथ। और जोड़ने से पहले इनमें से कुछ को अच्छी तरह सीख लें।
कुल 19 दुआएँ और ज़िक्र, जिन्हें इसलिए चुना गया कि वे सीखे जा सकें, इसलिए नहीं कि सूची पूरी हो।
क़ुरआन के शब्द और हदीस के शब्द अलग-अलग बताए गए हैं।
आपके अपने शब्दों का भी स्वागत है, और यह पेज उन्हें आपके अपने शब्द बताता है, न कि रिवायत से आए हुए।
अगर आप ख़ुद को नुक़सान पहुँचा सकते हैं, असुरक्षित महसूस करते हैं, आपके साथ ज़्यादती हो रही है, या दिन काटना मुश्किल हो रहा है, तो इमरजेंसी सेवाओं, संकट हेल्पलाइन, डॉक्टर या किसी भरोसेमंद स्थानीय पेशेवर को कॉल करें। दुआ और व्यावहारिक मदद साथ चलती हैं। एक, दूसरे की जगह नहीं लेती।
कुछ छोटे वाक्यों से शुरू करें जिन्हें आप समझ सकें और आसानी से दोहरा सकें। ज़िक्र कोई दौड़ नहीं है, और कोई गिनती नहीं कर रहा।
سُبْحَانَ اللَّهِ
उच्चारण
SubhanAllah
अर्थ
अल्लाह पाक है।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
एक छोटा ज़िक्र जो आपके दिल को फिर से अल्लाह की ओर मोड़ देता है। तब काम आता है जब मन भटक गया हो।
الْحَمْدُ لِلَّهِ
उच्चारण
Alhamdulillah
अर्थ
सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए है।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
जब भी कोई नेमत नज़र आए, बड़ी या छोटी, तब कहें।
اللَّهُ أَكْبَرُ
उच्चारण
Allahu akbar
अर्थ
अल्लाह सबसे बड़ा है।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
इसे कहने से आपकी चिंताएँ, और जिनकी वजह से आप चिंतित हैं, वे सब फिर से अपने सही नाप में आ जाते हैं।
لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ
उच्चारण
La ilaha illa Allah
अर्थ
अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
यह इस्लामी अक़ीदे का दिल है। इसे ध्यान से कहें, पीछे चलती आवाज़ की तरह नहीं।
शुरुआत करने वाले को जिन दुआओं की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, वे नमाज़ में पहले से मौजूद हैं। नमाज़ से पहले आप नमाज़ की पुकार का जवाब दे सकते हैं। नमाज़ ख़त्म करने के बाद, उठने से पहले एक पल बैठकर छोटा सा ज़िक्र कर लें।
اللَّهُ أَكْبَرُ اللَّهُ أَكْبَرُ، اللَّهُ أَكْبَرُ اللَّهُ أَكْبَرُ أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ أَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ، أَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ حَيَّ عَلَى الصَّلَاةِ، حَيَّ عَلَى الصَّلَاةِ حَيَّ عَلَى الْفَلَاحِ، حَيَّ عَلَى الْفَلَاحِ اللَّهُ أَكْبَرُ اللَّهُ أَكْبَرُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ
उच्चारण
Allahu akbar (four times). Ash-hadu an la ilaha illallah (twice). Ash-hadu anna Muhammadan rasulullah (twice). Hayya 'alas-salah (twice). Hayya 'alal-falah (twice). Allahu akbar (twice). La ilaha illallah.
अर्थ
अल्लाह सबसे बड़ा है। मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं। मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं। नमाज़ की ओर आओ। कामयाबी की ओर आओ। अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
ये वे शब्द हैं जो अब्दुल्लाह इब्न ज़ैद को सिखाए गए और जिन्हें पैग़ंबर ने मंज़ूर किया (सुनन अबी दाऊद 499, अल-अलबानी ने इसे हसन सहीह बताया)। इक़ामत वह छोटी पुकार है जो नमाज़ शुरू होने से ठीक पहले कही जाती है: वही वाक्य, ज़्यादातर एक-एक बार, और साथ में 'क़द क़ामतिस-सलात' (नमाज़ खड़ी हो गई) जोड़ा जाता है। अलग-अलग समुदायों के शब्दों में छोटे फ़र्क़ से आपका जवाब नहीं बदलता।
لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ
उच्चारण
La hawla wa la quwwata illa billah
अर्थ
अल्लाह के सिवा न कोई ताक़त है, न कोई क़ुव्वत।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
पुकारने वाले के बाद हर वाक्य धीरे से दोहराएँ। 'हय्या अलस-सलात' और 'हय्या अलल-फ़लाह' पर उसकी जगह यह वाक्य कहें (सहीह मुस्लिम 385)। जवाब देने पर सवाब मिलता है, लेकिन यह आपकी नमाज़ की शर्त नहीं है, और आपको सब कुछ रोकने या इसे बिल्कुल सही करने की ज़रूरत नहीं। अज़ान ख़त्म होते ही नमाज़ पढ़ना भी ज़रूरी नहीं: नमाज़ के वक़्त के अंदर कभी भी पढ़ें, गिनी जाती है।
اللَّهُمَّ رَبَّ هَذِهِ الدَّعْوَةِ التَّامَّةِ وَالصَّلَاةِ الْقَائِمَةِ آتِ مُحَمَّدًا الْوَسِيلَةَ وَالْفَضِيلَةَ وَابْعَثْهُ مَقَامًا مَحْمُودًا الَّذِي وَعَدْتَهُ
उच्चारण
Allahumma Rabba hadhihid-da'watit-tammah, was-salatil-qa'imah, ati Muhammadanil-wasilata wal-fadilah, wab'athhu maqaman mahmudanil-ladhi wa'adtah.
अर्थ
ऐ अल्लाह, इस पूरी पुकार और शुरू होने वाली नमाज़ के रब, मुहम्मद को क़रीबी का मुक़ाम और ख़ास दर्जा दे, और उन्हें उस तारीफ़ वाले मुक़ाम पर पहुँचा जिसका तूने उनसे वादा किया है।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
पहले पैग़ंबर पर दुरूद भेजें, फिर यह दुआ पढ़ें (सहीह मुस्लिम 384; सहीह अल-बुख़ारी 614)। जुमे के दिन यह पुकार कारोबार छोड़कर नमाज़ के लिए जाने का इशारा भी है (क़ुरआन 62:9)।
اهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ
उच्चारण
Ihdinas-siratal-mustaqim
अर्थ
हमें सीधा रास्ता दिखा।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
आप इसे हर रकअत में पढ़ते हैं। अगर आप नमाज़ की किसी एक पंक्ति का अर्थ सबसे पहले सीखें, तो यही सीखें।
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ اللَّهُمَّ أَنْتَ السَّلَامُ وَمِنْكَ السَّلَامُ تَبَارَكْتَ يَا ذَا الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ
उच्चारण
Astaghfirullah (three times). Allahumma antas-salam wa minkas-salam, tabarakta ya dhal-jalali wal-ikram.
अर्थ
मैं अल्लाह से माफ़ी माँगता हूँ। ऐ अल्लाह, तू सलाम (शांति) है और तुझी से सलामती है। तू बरकत वाला है, ऐ बुज़ुर्गी और इज़्ज़त वाले।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
पैग़ंबर नमाज़ ख़त्म करते ही यह कहते थे (सहीह मुस्लिम 591)। गिनती शुरू होने से पहले आप लोगों को यही धीरे से कहते सुनते हैं। यह नमाज़ के बाद आता है और उसका हिस्सा नहीं है, इसलिए थोड़े से शुरू करें।
سُبْحَانَ اللَّهِ الْحَمْدُ لِلَّهِ اللَّهُ أَكْبَرُ
उच्चारण
SubhanAllah. Alhamdulillah. Allahu akbar.
अर्थ
अल्लाह की पाकी बयान करें, अल्लाह की तारीफ़ करें, और अल्लाह की बड़ाई का ऐलान करें।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
बहुत से मुसलमान हर नमाज़ के बाद इन्हें दोहराते हैं। हर एक को कुछ बार कहने से शुरू करें और पूरी गिनती बाद में सीखें।
इन्हें तब पढ़ें जब आप उलझन में हों, दो तरफ़ खिंच रहे हों, या डर हो कि आपका ईमान टिक नहीं पाएगा।
رَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً
उच्चारण
Rabbana la tuzigh qulubana ba'da idh hadaytana wa hab lana min ladunka rahmah
अर्थ
ऐ हमारे रब, हमें हिदायत देने के बाद हमारे दिलों को टेढ़ा न होने दे, और हमें अपनी ओर से रहमत अता कर।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
क़ुरआन की एक दुआ, उन दिनों के लिए जब आपको फिसलने या राह से भटकने का डर हो।
رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
उच्चारण
Rabbana atina fid-dunya hasanah wa fil-akhirati hasanah wa qina 'adhaban-nar
अर्थ
ऐ हमारे रब, हमें दुनिया में भी भलाई दे और आख़िरत में भी भलाई दे, और हमें आग के अज़ाब से बचा।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
क़ुरआन की एक छोटी दुआ, जो उस ज़िंदगी में भलाई माँगती है जो आप अभी जी रहे हैं, और उसके बाद वाली ज़िंदगी में भी।
दुआ और ज़िक्र सच्ची तसल्ली देते हैं। लेकिन जब आप संकट में हों, ख़ुद को नुक़सान पहुँचाने की सोच रहे हों, आपके साथ ज़्यादती हो रही हो, या दिन काटना मुश्किल हो, तब ये मदद की जगह नहीं ले सकते। अगर चिंता आपको बार-बार वुज़ू या नमाज़ दोहराने पर मजबूर करती है, तो वुज़ू वाले पेज पर "जब शक रुकते नहीं" का हिस्सा है, और मानसिक स्वास्थ्य वाला पेज बताता है कि मदद कहाँ मिलेगी।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحُزْنِ، وَالْعَجْزِ وَالْكَسَلِ، وَالْبُخْلِ وَالْجُبْنِ، وَضَلَعِ الدَّيْنِ وَغَلَبَةِ الرِّجَالِ
उच्चारण
Allahumma inni a'udhu bika minal-hammi wal-huzn, wal-'ajzi wal-kasal, wal-bukhli wal-jubn, wa dala'id-dayn wa ghalabatir-rijal
अर्थ
ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह माँगता/माँगती हूँ चिंता और ग़म से, बेबसी और आलस से, कंजूसी और बुज़दिली से, क़र्ज़ के बोझ से और लोगों के दबाव में आ जाने से।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
यह दुआ पढ़ें, और सामने जो व्यावहारिक क़दम है वह भी उठाएँ: फ़ोन कर लें, डॉक्टर से मिलें, किसी को बताएँ।
رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا
उच्चारण
Rabbana afrigh 'alayna sabran wa thabbit aqdamana
अर्थ
ऐ हमारे रब, हम पर सब्र उंडेल दे और हमारे क़दम जमा दे।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
क़ुरआन की एक दुआ, किसी मुश्किल काम से ठीक पहले के पल के लिए, जब सब्र और हिम्मत दोनों एक साथ चाहिए।
तौबा सिर्फ़ बड़ी नाकामियों के लिए नहीं है। यह अल्लाह की ओर एक आम, नियमित वापसी है, ईमानदारी और उम्मीद के साथ।
اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ، خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ، وَأَنَا عَلَى عَهْدِكَ وَوَعْدِكَ مَا اسْتَطَعْتُ، أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا صَنَعْتُ، أَبُوءُ لَكَ بِنِعْمَتِكَ عَلَيَّ، وَأَبُوءُ بِذَنْبِي، فَاغْفِرْ لِي فَإِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ
उच्चारण
Allahumma anta Rabbi la ilaha illa ant, khalaqtani wa ana 'abduk, wa ana 'ala 'ahdika wa wa'dika mastata't...
अर्थ
ऐ अल्लाह, तू मेरा रब है। मैं तेरी नेमतों और अपने गुनाहों को मानता/मानती हूँ, तो मुझे माफ़ कर दे, क्योंकि तेरे सिवा कोई गुनाह माफ़ नहीं करता।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
यह शुरुआती वाक्यों से लंबी है। इसे एक-एक पंक्ति करके सीखें, और सीखते हुए इसका अर्थ सामने रखें।
رَبَّنَا آمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا وَأَنْتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَ
उच्चारण
Rabbana amanna faghfir lana warhamna wa anta khayrur-rahimin
अर्थ
ऐ हमारे रब, हम ईमान लाए, तो हमें माफ़ कर दे और हम पर रहम कर, तू सबसे अच्छा रहम करने वाला है।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
क़ुरआन की एक छोटी दुआ, जो ईमान, माफ़ी और रहमत को एक ही वाक्य में जोड़ देती है।
कोई किताब खोलने, सवाल पूछने या परिवार के साथ बैठने से पहले अल्लाह से साफ़ समझ और नरम बोली माँगें।
رَبِّ اشْرَحْ لِي صَدْرِي وَيَسِّرْ لِي أَمْرِي وَاحْلُلْ عُقْدَةً مِّن لِّسَانِي يَفْقَهُوا قَوْلِي
उच्चारण
Rabbi ishrah li sadri. Wa yassir li amri. Wahlul 'uqdatan min lisani. Yafqahu qawli.
अर्थ
ऐ मेरे रब, मेरा सीना खोल दे, मेरा काम आसान कर दे, मेरी ज़बान की गिरह खोल दे, ताकि लोग मेरी बात समझ सकें।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
यह पैग़ंबर मूसा (उन पर सलामती हो) की दुआ है। बहुत से नए मुसलमान इसे ऐसी बातचीत से पहले पढ़ते हैं जिससे वे घबरा रहे हों।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا، وَرِزْقًا طَيِّبًا، وَعَمَلًا مُتَقَبَّلًا
उच्चारण
Allahumma inni as'aluka 'ilman nafi'a, wa rizqan tayyiba, wa 'amalan mutaqabbala
अर्थ
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे फ़ायदेमंद इल्म, पाक रोज़ी और क़बूल होने वाले अमल माँगता/माँगती हूँ।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
इस्लाम की किसी क्लास से पहले काम की है, और काम, स्कूल या कोई हुनर सीखने से पहले भी उतनी ही काम की।
आप उसी भाषा में अल्लाह को पुकार सकते हैं जिसमें आप सच में सोचते हैं। बस मन में अपने शब्दों को क़ुरआन और पैग़ंबर के शब्दों से अलग रखें।
इसके लिए अरबी के कोई तय शब्द नहीं हैं।
अर्थ
मिसाल: ऐ अल्लाह, मुझे हिदायत दे, मुझे माफ़ कर दे, मेरे लिए नमाज़ आसान कर दे, और मेरी ज़िंदगी में अच्छे लोग ला।
शुरुआत करने वालों के लिए नोट
ये निजी शब्द हैं, रिवायत से आई दुआ नहीं। अल्लाह से जो चाहिए, अपनी भाषा में, अपने शब्दों में माँगें।
आपके आसपास के मुसलमान आम बातचीत में ये छोटे अरबी वाक्य इस्तेमाल करेंगे। हर कार्ड अर्थ बताता है, लोग इसे कब कहते हैं, और अगर कोई जवाब है तो वह भी। जहाँ जवाब हदीस के शब्द नहीं, बल्कि आम शिष्टाचार है, वहाँ कार्ड यह बता देता है।
السَّلَامُ عَلَيْكُمْ
अर्थ
आप पर सलामती हो।
कब कहें
जब आप किसी मुसलमान से मिलें, मस्जिद पहुँचें, किसी घर में दाख़िल हों या फ़ोन कॉल शुरू करें।
जवाबक़ुरआन या हदीस के शब्द
व अलैकुमुस्सलाम (और आप पर भी सलामती हो)। आप साथ में व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू (और अल्लाह की रहमत और उसकी बरकतें) भी जोड़ सकते हैं।
क़ुरआन कहता है कि सलाम का जवाब उससे बेहतर या कम से कम उसी जैसे सलाम से दें। अबू दाऊद की एक हदीस हर पूरे रूप के लिए ज़्यादा सवाब बताती है।
بِسْمِ اللَّهِ
अर्थ
अल्लाह के नाम से।
कब कहें
खाने से पहले, वुज़ू से पहले, और कोई काम शुरू करने से पहले।
पैग़ंबर ने अपने दस्तरख़्वान पर बैठे एक लड़के से कहा कि खाने से पहले अल्लाह का नाम ले।
إِنْ شَاءَ اللَّهُ
अर्थ
अगर अल्लाह ने चाहा।
कब कहें
जब आप किसी ऐसी बात का ज़िक्र करें जो करने का इरादा है: "कल मिलते हैं, इन शा अल्लाह।"
क़ुरआन इसे योजनाओं के लिए सिखाता है। यह पसंदीदा है, ज़रूरी नहीं, और अगर भूल जाएँ तो याद आने पर कह सकते हैं। कुछ लोग इसे नरम "शायद" की तरह इस्तेमाल करते हैं। यह एक आदत है, इसका अर्थ नहीं, इसलिए इसे तब कहें जब आपका सचमुच वह काम करने का इरादा हो।
مَا شَاءَ اللَّهُ
अर्थ
यह वही है जो अल्लाह ने चाहा।
कब कहें
जब आप कुछ अच्छा देखें या सुनें: नया बच्चा, नया घर, किसी की तरक़्क़ी।
ये शब्द क़ुरआन 18:39 से हैं, जो आगे कहता है: ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह (अल्लाह के सिवा कोई ताक़त नहीं)। बुरी ख़बर पर इसकी जगह इन्ना लिल्लाहि कहें।
الْحَمْدُ لِلَّهِ
अर्थ
सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए है।
कब कहें
शुक्र अदा करने के लिए, "आप कैसे हैं?" का जवाब देने के लिए, और छींकने के बाद।
سُبْحَانَ اللَّهِ
अर्थ
अल्लाह पाक है।
कब कहें
किसी भी समय ज़िक्र के तौर पर, नमाज़ के बाद भी। बहुत से लोग इसे तब भी कहते हैं जब किसी बात पर हैरान होते हैं।
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ
अर्थ
मैं अल्लाह से माफ़ी माँगता हूँ।
कब कहें
किसी चूक के बाद, जब आपको एहसास हो कि कुछ ग़लत किया, या रोज़ के ज़िक्र के तौर पर।
पैग़ंबर दिन में सत्तर से ज़्यादा बार माफ़ी माँगते थे, इसलिए इसे कहना एक आम आदत है, किसी भयानक बात का इक़रार नहीं।
وَاللَّهِ
अर्थ
अल्लाह की क़सम। यह एक क़सम है, जैसे यह कहना कि "मैं अल्लाह की क़सम खाता हूँ।"
कब कहें
जब कोई आपको यक़ीन दिलाना चाहे कि वह सच कह रहा है: "वल्लाहि, मुझे नहीं पता था।"
यह एक क़सम है, इसलिए इसे तभी कहें जब आपका सचमुच यही मतलब हो, और क़सम सिर्फ़ अल्लाह की खाएँ, किसी और इंसान या चीज़ की कभी नहीं। क़ुरआन कहता है कि अल्लाह अनजाने में खाई गई क़समों पर आपकी पकड़ नहीं करता, लेकिन फ़िक़्ह के मज़हबों में इस पर मतभेद है कि बातचीत में यूँ ही खाई गई कौन-सी क़समें अनजाने की क़सम गिनी जाती हैं, इसलिए अगर आपको यक़ीन न हो तो किसी उस्ताद से पूछें। अगर आप कोई काम करने या न करने की सच्ची क़सम खाकर उसे तोड़ दें, तो उसका कफ़्फ़ारा दस ग़रीबों को खाना खिलाना या कपड़े देना है, और अगर आप यह न कर सकें तो तीन दिन रोज़े रखना।
جَزَاكَ اللَّهُ خَيْرًا
अर्थ
अल्लाह आपको भलाई का बदला दे।
कब कहें
किसी ऐसे व्यक्ति का शुक्रिया अदा करने के लिए जिसने आपकी मदद की या आप पर कोई एहसान किया।
जवाबआम शिष्टाचार, सुन्नत का कोई पाठ नहीं
व इय्याक या व इय्याकुम (और आपको भी), या व अंतुम फ़ जज़ाकुमुल्लाहु ख़ैरन (और अल्लाह आपको भी भलाई का बदला दे)।
अत-तिर्मिज़ी की एक हदीस इन शब्दों को किसी का शुक्रिया अदा करने का सबसे पूरा तरीक़ा कहती है। इसे हसन बताया गया है।
بَارَكَ اللَّهُ فِيكَ
अर्थ
अल्लाह आपको बरकत दे।
कब कहें
किसी का शुक्रिया अदा करने या हौसला बढ़ाने के लिए।
जवाबआम शिष्टाचार, सुन्नत का कोई पाठ नहीं
व फ़ीक (और आपको भी)।
ये शब्द उस दुआ के क़रीब हैं जो पैग़ंबर शादियों में देते थे (नीचे शादी वाला कार्ड देखें)। छोटा जवाब आम शिष्टाचार है।
يَرْحَمُكَ اللَّهُ
अर्थ
अल्लाह आप पर रहम करे।
कब कहें
जब आपके पास कोई छींके और अल्हम्दुलिल्लाह कहे।
जवाबक़ुरआन या हदीस के शब्द
छींकने वाला जवाब देता है: यहदीकुमुल्लाहु व युस्लिहु बालकुम (अल्लाह आपको हिदायत दे और आपके हालात ठीक करे)।
तीनों वाक्य सहीह अल-बुख़ारी की एक ही हदीस से हैं।
آمِين
अर्थ
ऐ अल्लाह, क़ुबूल कर।
कब कहें
किसी के दुआ करने के बाद, और जमाअत की नमाज़ में जब इमाम अल-फ़ातिहा ख़त्म करके आमीन कहें।
सहीह अल-बुख़ारी और सहीह मुस्लिम की दो हदीसें इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ने वालों से कहती हैं कि जब इमाम आमीन कहें तो वे भी कहें। अपनी नमाज़ में इसे कहने के बारे में सवाल हों, तो किसी उस्ताद से पूछें।
إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ
अर्थ
बेशक हम अल्लाह के हैं और उसी की ओर लौटने वाले हैं।
कब कहें
जब आप किसी की मौत या कोई भी नुक़सान, बड़ा या छोटा, सुनें।
ये शब्द क़ुरआन 2:156 से हैं। सहीह मुस्लिम की एक हदीस इसके साथ एक छोटी दुआ जोड़ती है: अल्लाहुम्मअजुरनी फ़ी मुसीबती व अख़्लिफ़ ली ख़ैरम मिन्हा (ऐ अल्लाह, मुझे मेरे नुक़सान का बदला दे और मुझे उससे बेहतर दे)।
إِنَّ لِلَّهِ مَا أَخَذَ وَلَهُ مَا أَعْطَى
अर्थ
अल्लाह जो लेता है वह उसी का है, और जो देता है वह भी उसी का है। उसके पास हर चीज़ का एक तय वक़्त है।
कब कहें
किसी की मौत के बाद किसी को तसल्ली देने के लिए।
पैग़ंबर ने ये शब्द अपनी बेटी को भेजे जब उनका बच्चा मौत के क़रीब था, साथ में सब्र करने और सवाब की उम्मीद रखने की सलाह दी। वे ख़ुद भी रोए, और अपने आँसुओं को रहमत कहा। "मुझे बहुत अफ़सोस है" कहना और परिवार के साथ बैठना भी सही है।
لَا بَأْسَ طَهُورٌ إِنْ شَاءَ اللَّهُ
अर्थ
कोई हर्ज नहीं, यह पाकी है, अगर अल्लाह ने चाहा। यह शब्दशः अनुवाद है; Sunnah.com का अनुवाद है "आपको कोई नुक़सान नहीं होगा! अल्लाह आपको शिफ़ा दे!"
कब कहें
जब आप किसी बीमार से मिलने जाएँ।
أَسْتَوْدِعُ اللَّهَ دِينَكَ وَأَمَانَتَكَ وَخَوَاتِيمَ عَمَلِكَ
अर्थ
मैं आपका दीन, आपकी अमानतें और आपके आख़िरी अमल अल्लाह के सुपुर्द करता हूँ।
कब कहें
जब कोई सफ़र पर निकल रहा हो।
पूरा वाक्य है अस्तौदिउल्लाह दीनक व अमानतक व ख़वातीम अमलिक। अत-तिर्मिज़ी की एक हदीस, जिसे हसन बताया गया है, पैग़ंबर का इसे कहना बयान करती है।
بَارَكَ اللَّهُ لَكَ وَبَارَكَ عَلَيْكَ وَجَمَعَ بَيْنَكُمَا فِي خَيْرٍ
अर्थ
अल्लाह आपको बरकत दे, आप पर बरकतें उतारे, और आप दोनों को भलाई में साथ रखे।
कब कहें
किसी को, जिसकी अभी शादी हुई हो, मुबारकबाद देने के लिए।
पूरा वाक्य व जमअ बैनकुमा फ़ी ख़ैर पर ख़त्म होता है। यह पैग़ंबर की अपनी मुबारकबाद है, अबू दाऊद की एक हदीस में, जिसे सहीह बताया गया है।
تَقَبَّلَ اللَّهُ مِنَّا وَمِنْكُمْ
अर्थ
ईद मुबारक हो। अल्लाह हमसे और आपसे क़ुबूल करे।
कब कहें
ईद के दिनों में।
जवाबआम शिष्टाचार, सुन्नत का कोई पाठ नहीं
वही शब्द वापस, या ईद मुबारक।
सहाबा ईद पर एक-दूसरे को "अल्लाह हमसे और आपसे क़ुबूल करे" कहकर मुबारकबाद देते थे, और कोई भी अच्छी मुबारकबाद, ईद मुबारक समेत, ठीक है। लोग किसी के नमाज़ पढ़ने, रोज़ा रखने या ख़ैरात देने के बाद भी एक नेक ख़्वाहिश के तौर पर तक़ब्बलल्लाह (अल्लाह क़ुबूल करे) कहते हैं।
صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
अर्थ
अल्लाह उन पर रहमत और सलामती भेजे। हिंदी में, "उन पर शांति हो"।
कब कहें
जब आप पैग़ंबर मुहम्मद का नाम कहें, सुनें या पढ़ें।
क़ुरआन ईमान वालों से कहता है कि पैग़ंबर पर दुरूद और सलाम भेजें। सवाल और जवाब वाला पेज SAW और PBUH जैसे छोटे रूप समझाता है।
कनाडा के बहुत से मुसलमान घर पर उर्दू, बांग्ला, फ़ारसी, तुर्की या अरबी बोलते हुए बड़े हुए, और रोज़ के कुछ शब्द साथ चले आते हैं। ये धार्मिक शब्द नहीं हैं, और कोई आपसे इन्हें इस्तेमाल करने की उम्मीद नहीं करता।
धीरे-धीरे सुब्हानअल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह और अल्लाहु अकबर कहें। जब यह जम जाए, तो पूरी गिनती जोड़ें।
एक छोटी दुआ पढ़ें, साँस लें, फिर एक व्यावहारिक काम करें: किसी भरोसेमंद व्यक्ति को फ़ोन करें, ख़तरे से बाहर निकलें, मदद माँगें।
किसी क्लास, किताब या मुश्किल बातचीत से पहले अल्लाह से फ़ायदेमंद इल्म और खुला दिल माँगें।
यहाँ दिए गए हवाले जाँचे जा चुके हैं। हदीस के शब्द, उच्चारण और कोई भी निजी बात अब भी किसी योग्य व्यक्ति से जाँचनी ज़रूरी है।
Quran.com - क़ुरआन के पाठ और अनुवाद का संदर्भ
सूरह अल-फ़ातिहा के अरबी पाठ का स्रोत, जो नमाज़ की तिलावत में और हिदायत की दुआ में इस्तेमाल होता है। अंग्रेज़ी शब्द अर्थ का अनुवाद हैं।
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इस याद दिलाने के लिए दिया गया है कि आप सीधे अल्लाह से दुआ कर सकते हैं। गाइड में दिए गए उदाहरण के शब्दों को पैग़ंबर से मिली दुआ के तौर पर पेश नहीं किया गया है।
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क़ुरआन की उस दुआ का स्रोत जिसमें इस दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई माँगी गई है। अंग्रेज़ी शब्द अर्थ का अनुवाद हैं।
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क़ुरआन की उस दुआ का स्रोत जिसमें किसी मुश्किल से पहले सब्र और क़दमों की मज़बूती माँगी गई है।
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क़ुरआन की उस दुआ का स्रोत जिसमें अल्लाह से माँगा गया है कि हिदायत के बाद दिल को भटकने न दे।
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क़ुरआन की उस दुआ का स्रोत जिसमें किसी मुश्किल बातचीत से पहले खुला दिल, आसानी, साफ़ ज़बान और समझ माँगी गई है।
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क़ुरआन की उस दुआ का स्रोत जिसमें माफ़ी और रहमत माँगी गई है।
Sunnah.com - हदीस संदर्भ
दुआ और ज़िक्र वाले पेज में नमाज़ के बाद के ज़िक्र के तरीक़े और उसके मुख्य वाक्यों का स्रोत।
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तौबा की उस दुआ का स्रोत जिसे सय्यिदुल इस्तिग़फ़ार कहा जाता है।
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उस दुआ का स्रोत जिसमें चिंता, ग़म, बेबसी, आलस, क़र्ज़ और दूसरों के दबाव से पनाह माँगी गई है।
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उस दुआ का स्रोत जिसमें फ़ायदेमंद इल्म, अच्छी रोज़ी और क़बूल होने वाले अमल माँगे गए हैं।
Darussalam UK - इस्लामी किताबों का प्रकाशक
प्रकाशक की दुकान, जिसे दुआ और ज़िक्र की किताबों के लिए इस्तेमाल किया गया है, बेनाम PDF कॉपियों की जगह। यह साइट Darussalam UK की दुकान है, और दाम डिफ़ॉल्ट रूप से पाउंड में हैं।
Centre for Addiction and Mental Health (CAMH), funded by the Government of Canada - संकट में सहायता
कनाडा की राष्ट्रीय आत्महत्या संकट हेल्पलाइन। 9-8-8 पर कॉल या टेक्स्ट करें, दिन के 24 घंटे, साल के हर दिन, अंग्रेज़ी और फ़्रेंच में। इसे CAMH चलाता है और कनाडा सरकार इसका ख़र्च उठाती है। 23 सितंबर 2026 को जाँचा गया।
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सुनन अबी दाऊद 499 (अब्दुल्लाह इब्न ज़ैद): अज़ान और इक़ामत के वे शब्द जो उन्हें ख़्वाब में सिखाए गए और जिन्हें पैग़ंबर ने मंज़ूर किया। अल-अल्बानी ने इसे हसन सहीह कहा है।
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सहीह मुस्लिम 385 (उमर): अज़ान का हर वाक्य दोहराओ, और 'नमाज़ की तरफ़ आओ' और 'कामयाबी की तरफ़ आओ' पर कहो 'अल्लाह के सिवा न कोई ताक़त है न कोई क़ुव्वत'। सहीह।
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सहीह मुस्लिम 384 (अब्दुल्लाह इब्न अम्र): जब तुम मुअज़्ज़िन को सुनो, तो वही कहो जो वह कहता है, फिर पैग़ंबर पर दुरूद भेजो और अल्लाह से उनके लिए अल-वसीला माँगो। सहीह।
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सहीह अल-बुख़ारी 614 (जाबिर): अज़ान सुनने के बाद की दुआ 'अल्लाहुम्मा रब्बा हाज़िहिद्-दअवतित्-ताम्मा'। सहीह।
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जब शुक्रवार को नमाज़ के लिए पुकारा जाए, तो अल्लाह की याद की तरफ़ जल्दी चलो और ख़रीद-फ़रोख़्त छोड़ दो (अल-जुमुआ 62:9)।
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सहीह मुस्लिम 591 (सौबान): नमाज़ ख़त्म करने के बाद पैग़ंबर तीन बार माफ़ी माँगते और कहते 'अल्लाहुम्मा अंतस्-सलाम व मिंकस्-सलाम, तबारक्ता या ज़ल-जलालि वल-इकराम'। सहीह।